वाद

प्रतिवाद :- "यहाँ‌ शोध मे बहु-पत्नियों का जिक तो खैर नही किया गया है इस लिये उस पर कोई टिप्प्णी नहीं। अब आते है तार्किक्ता पर। खेतिहर पुरूष और शिकारी तथा घूमन्तू पुरूष मे समसे बडा अंतर है स्थायित्व। जहाँ घुमन्तु पुरूष...

प्रतिवाद

इससे पूर्व की हम बात आगे बढायें, आपको इस नये स्तंभ की थोडी जानकारी दे दें। हम रचनायें प्रकाशित करते हैं‌, उन्हे पढते हैं लेकिन उनका समालोचनात्मक विश्लेषण नही होता है। ब्लागिगं जगत की तू मेरी पीठ खुजा मै तेरी प्रवत्ति कल्किआन मे वर्जित है। इसीलिय...

अति सर्वत्र वर्जयेत

कविता बनती है,
करुणा दया ममता और प्रेम की-
अनुभूति से;  और-
उसी अनुभूति से अभिभूत होकर,
जन्म लेता है -
विज्ञान।

जन-जन की कठिनाइयां,
घोर परिश्रम,
दुष्कर कार्य स्थिति से जन्म लेते हैं,
तंत्र मन्त्र और यंत्र;
और वाहक बनते हैं, मानव की-
सुख समृद्धि और आनंद के।

शास्त्र,  काव्य, पुराण और-
वैज्ञानिक आविष्कार;
जन्म लेते हैं, करने को सुधार-
मानव जीवन का;
ताकि यह यात्रा हो पूर्ण सानंद,
मानव रहे सत् चित आनंद।

परन्तु जब यही शास्त्र,
वैज्ञानिक आविष्कार,
सामाजिक सरोकार,होजाते हैं-
अति सुख अभिलाषा के शिकार;
मानव के लिए हुआ था,
जिनका आविष्कार;
हो जाते हैं मानव के,
तन पर, मन पर सवार;
जनक पर पुत्र का अधिकार,
गुरु पर शिष्य सवार।
कर लेते हैं तब,
सभी सुख रूपी आविष्कार,
शास्त्र  विचार,
मानवता पर अधिकार।
मानव सिर्फ रह जाता है,
यंत्राश्रित, यंत्र मानव, एक यंत्र विचार।

मानव बांध जाता है,
यंत्र जंजाल में, माया के संजाल में।
सिर्फ यंत्रों को बनाने हेतु,
उपयोग में लाने हेतु,
रह जाता है उसका व्यवहार।

यंत्र हो जाता है,
सभ्यता पर सवार,
और युग-बोध होजाता है,
यन्त्रमेव जयते।
इसीलिये कहते हैं, शास्त्रकार-
करके पूर्ण प्रज्ञा विचार,
अति सर्वत्र वर्जयेत।

--डा श्याम गुप्ता

आप को तो पता ही है कि कुछ समय

आप को तो पता ही है कि कुछ समय से कल्किऑन ने हिन्दी विज्ञान कथा कविता (एस0 एफ0 पोइट्री)प्रकाशित करना प्रारम्भ किया है। पर अब तक हिन्दी विज्ञान कथा कविता (एस0 एफ0 पोइट्री)के नाम पर छपने वाली हिन्दी कविताओं में अधिकांश या तो विज्ञान कवितायें है या सामान्य कवितायें। अब तक छपीं कुछ कवितायें ही हिन्दी विज्ञान कथा कविता (एस0 एफ0 पोइट्री) की श्रेणी में आतीं हैं। वस्तुत: विज्ञान कथा कविता (एस0 एफ0 पोइट्री) में एक विज्ञान कथा अन्तर्निहित होती है। सादे शब्दों में कहें तो विज्ञान कथा कविता (एस0 एफ0 पोइट्री) वह होती है जिसके कथ्य पर एक विज्ञान कथा लिखी जा सके। ये सिर्फ मेरा मत है। हो सकता है कि आप इससे इतर सोचते हों। इन्ही सारी मान्यताओं और मानदण्डों के निर्धारण हेतु, विज्ञान कथा कविता विषयक विभ्रमों के निवारण हेतु और हिन्दी विज्ञान कथा कविता के विकास को ध्यान मे रखते हुये कल्किऑन का एक अंक हिन्दी विज्ञान कथा कविता विशेषांक के रुप में निकालना प्रस्तावित है। समय और अंक की घोषणा बाद में की जायेगी। इस अंक में निम्न विषयों पर सामिग्री प्रकाशित करने की योजना है • हिन्दी कविता: कितनी दूर कितनी पास • हिन्दी कविता : रुप और विभेद • हिन्दी कविता का नया आयाम : हिन्दी विज्ञान कथा कविता • भारतीय पौराणिक आख्यान: हिन्दी विज्ञान कविता के सन्दर्भ में • क्या होती है विज्ञान कथा कविता (एस0 एफ0 पोइट्री) • हिन्दी विज्ञान कथा कविता: स्वरूप और सम्भावना • विज्ञान कथा कविता (एस0 एफ0 पोइट्री) : रुप और विभेद • हिन्दी कविता बनाम हिन्दी विज्ञान कथा कविता (एस0 एफ0 पोइट्री) • हिन्दी विज्ञान कविता बनाम हिन्दी विज्ञान कथा कविता • हिन्दी विज्ञान कथा बनाम हिन्दी विज्ञान कथा कविता • हाइकू: विज्ञान कथा कविता में • हिन्दी कविता का वर्तमान परिदृश्य: हिन्दी विज्ञान कथा कविता के सन्दर्भ में • अन्य भारतीय भाषाओं में विज्ञान कथा कविता • अंग्रेजी साहित्य में विज्ञान कथा कविता • हिन्दी साहित्य में विज्ञान कथा कविता • अन्य भाषाओं में विज्ञान कथा कविता • प्रख्यात विज्ञान कथा कवितायें • प्रख्यात विज्ञान कथा कवि • कुछ चुनी हुई हिन्दी विज्ञान कथा कवितायें • कुछ चुने हुये हिन्दी विज्ञान कथा कवि • इसके अतिरिक्त विज्ञान कथा कविता से जुड़े अन्य पहलुओं पर चर्चा जिन्हें आप उपयुक्त और समीचीन समझते हों चूंकि आप एक सिद्धहस्त विज्ञान कथा कविता लेखक हैं अत: आपसे निवेदन है कि आप उपरोक्त अंक हेतु उपरोक्त या अन्य उपयुक्त बिन्दुओं रचनायें भेज कर उक्त विशेषांक के प्रकाशन में सहयोग करें अपनी रचनाये पर sampadak@kalkion.com, arnieswap@gmail.com, swapnil@kalkion.com, rachna@kalkion.com या arvind@kalkion.com पर भेजें हमे आपके उत्तरो की प्रतीक्षा रहेगी भवदीय अरविन्द दुबे कार्यकारी सम्पादक कल्किआन arvind@kalkion.com

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