वाद

प्रतिवाद :- "यहाँ‌ शोध मे बहु-पत्नियों का जिक तो खैर नही किया गया है इस लिये उस पर कोई टिप्प्णी नहीं। अब आते है तार्किक्ता पर। खेतिहर पुरूष और शिकारी तथा घूमन्तू पुरूष मे समसे बडा अंतर है स्थायित्व। जहाँ घुमन्तु पुरूष...

प्रतिवाद

इससे पूर्व की हम बात आगे बढायें, आपको इस नये स्तंभ की थोडी जानकारी दे दें। हम रचनायें प्रकाशित करते हैं‌, उन्हे पढते हैं लेकिन उनका समालोचनात्मक विश्लेषण नही होता है। ब्लागिगं जगत की तू मेरी पीठ खुजा मै तेरी प्रवत्ति कल्किआन मे वर्जित है। इसीलिय...

प्रकृति और हम

आकाश गंगा के कोने में तीव्र प्रकाश
और फिर एक विस्फोट
टिमटिमाती मणियां बिखर गयीं
सूरज का जन्म हुआ

कुछ समय और बीता
फिर एक मुठभेड़ हुई
आकाश के अंधेरे में
पृथ्वी का जन्म हुआ

लोग कहते हैं कि पृथ्वी से
किसी दानवाकृति की
तीखी तकरार में
चन्द्रमा का जन्म हुआ

विस्फोट, मुठभेड़, तकरार
प्रकाश, अंधेरा टिमटिम
के साथ साथ अदृश्य
आकर्षण भी गति करता रहा

आकर्षण देता है अर्थ
विध्वंस और निर्माण को
ठीक वैसे ही प्यार देता है
अर्थ जीवन को, मृत्यु को

-- हेमन्त द्विवेदी

Prakriti Aur Hum

(1)We should not take death as the end of life.In Indian tradition. death is considered as an important point of life but not the end point.Hence we have a concept of rebirth. (2)Actually a significant end is a end. An useless life has no end like Ashwasthama's.In that sense, it is said that when the love provides a meaning to the life, it provides a meaning to the end. (3)Recollect that when someone said to Gurudev Ravindranath Tagore at his end,"What do you feel at this point when you performed all your duties and responsibilities ?". Gurudev replied,"Very sorry, when I understood the life a little bit, I'm going. Leaving behind a great deal of task of mine." Only a heart full of love can answer like this. (4)I'm sorry that I couldn't succeed to paste this in Hindi

आप को तो पता ही है कि कुछ समय

आप को तो पता ही है कि कुछ समय से कल्किऑन ने हिन्दी विज्ञान कथा कविता (एस0 एफ0 पोइट्री)प्रकाशित करना प्रारम्भ किया है। पर अब तक हिन्दी विज्ञान कथा कविता (एस0 एफ0 पोइट्री)के नाम पर छपने वाली हिन्दी कविताओं में अधिकांश या तो विज्ञान कवितायें है या सामान्य कवितायें। अब तक छपीं कुछ कवितायें ही हिन्दी विज्ञान कथा कविता (एस0 एफ0 पोइट्री) की श्रेणी में आतीं हैं। वस्तुत: विज्ञान कथा कविता (एस0 एफ0 पोइट्री) में एक विज्ञान कथा अन्तर्निहित होती है। सादे शब्दों में कहें तो विज्ञान कथा कविता (एस0 एफ0 पोइट्री) वह होती है जिसके कथ्य पर एक विज्ञान कथा लिखी जा सके। ये सिर्फ मेरा मत है। हो सकता है कि आप इससे इतर सोचते हों। इन्ही सारी मान्यताओं और मानदण्डों के निर्धारण हेतु, विज्ञान कथा कविता विषयक विभ्रमों के निवारण हेतु और हिन्दी विज्ञान कथा कविता के विकास को ध्यान मे रखते हुये कल्किऑन का एक अंक हिन्दी विज्ञान कथा कविता विशेषांक के रुप में निकालना प्रस्तावित है। समय और अंक की घोषणा बाद में की जायेगी। इस अंक में निम्न विषयों पर सामिग्री प्रकाशित करने की योजना है • हिन्दी कविता: कितनी दूर कितनी पास • हिन्दी कविता : रुप और विभेद • हिन्दी कविता का नया आयाम : हिन्दी विज्ञान कथा कविता • भारतीय पौराणिक आख्यान: हिन्दी विज्ञान कविता के सन्दर्भ में • क्या होती है विज्ञान कथा कविता (एस0 एफ0 पोइट्री) • हिन्दी विज्ञान कथा कविता: स्वरूप और सम्भावना • विज्ञान कथा कविता (एस0 एफ0 पोइट्री) : रुप और विभेद • हिन्दी कविता बनाम हिन्दी विज्ञान कथा कविता (एस0 एफ0 पोइट्री) • हिन्दी विज्ञान कविता बनाम हिन्दी विज्ञान कथा कविता • हिन्दी विज्ञान कथा बनाम हिन्दी विज्ञान कथा कविता • हाइकू: विज्ञान कथा कविता में • हिन्दी कविता का वर्तमान परिदृश्य: हिन्दी विज्ञान कथा कविता के सन्दर्भ में • अन्य भारतीय भाषाओं में विज्ञान कथा कविता • अंग्रेजी साहित्य में विज्ञान कथा कविता • हिन्दी साहित्य में विज्ञान कथा कविता • अन्य भाषाओं में विज्ञान कथा कविता • प्रख्यात विज्ञान कथा कवितायें • प्रख्यात विज्ञान कथा कवि • कुछ चुनी हुई हिन्दी विज्ञान कथा कवितायें • कुछ चुने हुये हिन्दी विज्ञान कथा कवि • इसके अतिरिक्त विज्ञान कथा कविता से जुड़े अन्य पहलुओं पर चर्चा जिन्हें आप उपयुक्त और समीचीन समझते हों चूंकि आप एक सिद्धहस्त विज्ञान कथा कविता लेखक हैं अत: आपसे निवेदन है कि आप उपरोक्त अंक हेतु उपरोक्त या अन्य उपयुक्त बिन्दुओं रचनायें भेज कर उक्त विशेषांक के प्रकाशन में सहयोग करें अपनी रचनाये पर sampadak@kalkion.com, arnieswap@gmail.com, swapnil@kalkion.com, rachna@kalkion.com या arvind@kalkion.com पर भेजें हमे आपके उत्तरो की प्रतीक्षा रहेगी भवदीय अरविन्द दुबे कार्यकारी सम्पादक कल्किआन arvind@kalkion.com

सुन्दर, भाव- पूर्ण विग्यान

सुन्दर, भाव- पूर्ण विग्यान कविता, प्यार जीवन को अर्थ देता है सुन्दर बात है पर म्रत्यु को कैसे..?

Prakriti Aur Hum

(1)We should not take death as the end of life.In Indian tradition. death is considered as an important point of life but not the end point.Hence we have a concept of rebirth. (2)Actually a significant end is a end. An useless life has no end like Ashwasthama's.In that sense, it is said that when the love provides a meaning to the life, it provides a meaning to the end. (3)Recollect that when someone said to Gurudev Ravindranath Tagore at his end,"What do you feel at this point when you performed all your duties and responsibilities ?". Gurudev replied,"Very sorry, when I understood the life a little bit, I'm going. Leaving behind a great deal of task of mine." Only a heart full of love can answer like this. (4)I'm sorry that I couldn't succeed to paste this in Hindi.