वाद

प्रतिवाद :- "यहाँ‌ शोध मे बहु-पत्नियों का जिक तो खैर नही किया गया है इस लिये उस पर कोई टिप्प्णी नहीं। अब आते है तार्किक्ता पर। खेतिहर पुरूष और शिकारी तथा घूमन्तू पुरूष मे समसे बडा अंतर है स्थायित्व। जहाँ घुमन्तु पुरूष...

प्रतिवाद

इससे पूर्व की हम बात आगे बढायें, आपको इस नये स्तंभ की थोडी जानकारी दे दें। हम रचनायें प्रकाशित करते हैं‌, उन्हे पढते हैं लेकिन उनका समालोचनात्मक विश्लेषण नही होता है। ब्लागिगं जगत की तू मेरी पीठ खुजा मै तेरी प्रवत्ति कल्किआन मे वर्जित है। इसीलिय...

पेडों मे भी होता है नर-मादा का चक्कर: नयी खोज

एक नयी खोज ने अभी‌ तक की सभी मान्यताओं की धता बजा दी है। वैज्ञानिकों ने पौधों मे मादा लिंग हार्मोन प्रोजेस्टेरोन की मौजूदगी की विस्मयकारी खोज की है। अभी तक वैज्ञानिक यही मानते थे कि केवल पशु ही प्रोजेस्टेरोन का निर्माण कर सकते हैं। इस नवीनतम खोज को अमरीकम कैमिकल सोसाईटी मे प्रकाशित किया गया है। अंग्रेजी समाचार यहाँ पढें



प्रोजेस्टेरोन एक प्रकार का स्टेराईड हार्मोन होता है जो कि अंडाशय से स्रावित होता है। यही हार्मोन गर्भाशय को गर्भ के लिये तैयार करता है और गर्भधारण के उपरान्त भी उसकी रख रखाव करता है। इसी का इस्तेमाल गर्भ निरोधक तथा अन्य दवाईयों मे भी किया जाता है।

गुइडो एफ पाली ने इस पत्रिका मे प्रकाशित लेख मे लिखा है, "प्रोजेस्टेरोन की इस सपष्ट पहचान को अतिरंजित नही किया जा सकता। पशुओं मे इस हार्मोने की जैविक भूमिका पर गहन अध्यन किया गया है, लेकिन पौधों मे इसकी मौजूदगी को लेकर इतनी स्पष्टता नही थी।

इन वैज्ञानिकों का मानना है कि यह हार्मोन, अन्य स्टेराईड की ही‌ तरह ही एक जैव नियामक रहा होगा को करोडों साल पूर्व विकसित हुआ होगा। कालान्तर मे आधुनिक पौधों और पशुओं के आगमन के साथ इस हार्मोन ने भी इन जीवों, पौधों मे प्रवेश किया।

इस महत्वपूर्ण खोज के बाद यह संभावना है कि जीवों मे प्रोजेस्टेरोन की भूमिका को समझने मे मदद मिलेगी। इसके अलावा यह खोज विकासवाद के सिद्धांत को एक नयी दिशा प्रदान करेगा।

वैज्ञानिकों ने इससे पूर्व भी पौधों‌ मे प्रोजेस्टेरोन सरीखे पदार्थ का पता लगाया था। उस समय यह धारण बलवति हो उठी थी कि शायद पौधों मे यह प्रोजेस्टेरोन स्वंय भी मौजूद हो। लेकिन वैज्ञानिको को पौधों मे इस हार्मोन की मौजूदगी का अभी तक कोई निशान नही मिला था। इस खोज ने उनकी कोशिशों को फलीभूत कर दिया है।

विज्ञान की महिमा भी अनंत है। जितना गहरे जायेंगे उतनी गहराई मिलती जायेगी।

इसे नया चक्कर ना कहें,ये तो

इसे नया चक्कर ना कहें,ये तो जंतुजगत से भी पुराना है।

दिनेश जी, नया चक्कर नही कहा

दिनेश जी, नया चक्कर नही कहा गया हैं। समाचार मे स्पष्ट कहा गया है, "इन वैज्ञानिकों का मानना है कि यह हार्मोन, अन्य स्टेराईड की ही‌ तरह ही एक जैव नियामक रहा होगा को करोडों साल पूर्व विकसित हुआ होगा। कालान्तर मे आधुनिक पौधों और पशुओं के आगमन के साथ इस हार्मोन ने भी इन जीवों, पौधों मे प्रवेश किया।" यह समाचार वैज्ञानिकों‌ द्वारा प्रोजेस्टेरोन की पौधों मे मौजूदगी की‌ जो कायस लगायी जा रही थी उसकी पुष्टि की सूचना है। स्वप्निल

पुरा वनस्पति विग्यान् इसी

पुरा वनस्पति विग्यान इसी बात पर है . आप कौन सी नई बात बता रहे है?

धीरू, प्रतिक्रिया हेतु आभार।

धीरू, प्रतिक्रिया हेतु आभार। आपसे अनुरोध है कि कृपया 'गुइडो एफ पाली' तथा सोसाईटी को लिखें‌ और उनके दावे का खंडन करें कि यह सत्य नही है उन्हे स्पष्ट तौर पर लिखें कि "पूरा वनस्पति विग्यान इसी बात पर है। आप कौन सी नई बात बता रहे है?" वे आपको जो भी उत्तर दें‌ हमे उसकी सूचना दें‌, हम कल्किआन मे प्रकाशित कर देंगे। स्वप्निल भारतीय

पेडों में नर-मादा---

यह कोई नयी बात नहीं , सभी जानते हैं कि पेड भी नर मादा होते हैं--सबसे जाना हुआ उदाहरण --पपीता है ,जो नर व मादा अलग अलग पेड होता है। पुष्प तो सदैव ही -अकेले नर, अकेले मादा व उभय लिन्गी , तीनों प्रकार के होते हैं। पुष्पों में --नर व मादा अन्ग अलग अलग होते हैं। ---हार्मोनों के बिना सेक्स अलग अलग कैसे हो सकता है. हां पहले पहचान नहीं पाये , अब जान पाये हैं. तभी तो यह खोज है--रीसर्च- आविष्कार ( नव-प्रयणन) नहीं ।