वाद

प्रतिवाद :- "यहाँ‌ शोध मे बहु-पत्नियों का जिक तो खैर नही किया गया है इस लिये उस पर कोई टिप्प्णी नहीं। अब आते है तार्किक्ता पर। खेतिहर पुरूष और शिकारी तथा घूमन्तू पुरूष मे समसे बडा अंतर है स्थायित्व। जहाँ घुमन्तु पुरूष...

प्रतिवाद

इससे पूर्व की हम बात आगे बढायें, आपको इस नये स्तंभ की थोडी जानकारी दे दें। हम रचनायें प्रकाशित करते हैं‌, उन्हे पढते हैं लेकिन उनका समालोचनात्मक विश्लेषण नही होता है। ब्लागिगं जगत की तू मेरी पीठ खुजा मै तेरी प्रवत्ति कल्किआन मे वर्जित है। इसीलिय...

नारंगी की बात ही निराली है

यह तो हम जानते हैं कि नारंगी में भरपूर  विटामिन सी होता है, कि इसमें 'एन्टि-आक्सिडैंट' भी भरपूर हैं ,जो शरीर के प्रतिरक्षा तंत्र को सुदृढ़ करता है, सर्दी जुखाम में लाभ पहुंचाता है।



किन्तु अब वैज्ञानिकों ने इसमें एक और जादुई गुण ढ़ूंढ़  निकाला है, जो अन्य एन्टी आक्सिडैंट में नहीं पाया जाता। एन्टी आक्सिडैन्ट शरीर में गुण्डा गर्दी कर रहे छुट्टा आक्सीजन – मूलकों (रैडिकलों) का खातमा ही कर देते हैं।

उदाहरणार्थ, यह छुट्टा आक्सीजन – मूलक (रैडिकल) सिगरैट या तमाखू सेवन से शरीर में पैदा होते हैं। जैसा कि इनका नाम है यह आक्सीजन या किसी पैराक्साइड के 'आयन' अर्थात उनके अणु का वह रूप है जिसमें से एक इलैक्ट्रान भाग गया है, और अब वह विरही अणु एक इलैक्ट्रान के लिये बेताब होकर दौड़ रहा है।

ऐसी‌ हालत में यह स्वस्थ्य कोशिकाओं पर हमला करता है, इनसे कैन्सर जैसी बीमारियां भी होने का खतरा रहता है। और ये हजारों या लाखों की संख्या में लूटपाट करते हैं। लगभग सारे फ़ल तथा शाक सब्जियां इन गुण्डों का खातमा करते रहते हैं। विटामिन सी बहुत सशक्त एन्टी आक्सीडैन्ट है। यह दृष्टव्य है कि एन्टी आक्सीडैन्ट स्वयं अपना बलिदान कर हमारी कोशिकाओं की रक्षा करते हैं।

किन्तु अब वैज्ञानिकों ने खोज की है कि नारंगी के एन्टी आक्सीडैन्ट हमारे शरीर के वृद्धावस्था की दर को कम करते हैं अर्थात कोशिकाओं को युवा रखकर हमें युवा रखते हैं। बजाय नुकसानदेह  कृत्रिम रसायनों से निर्मित टानिकों को खाने या त्वचा को युवतर रखने वाली क्रीमों के लगाने के स्थान पर प्राकृतिक नारंगी खाएं और रोगों से भी‌ मुक्त रहें तथा युवतर भी रहें।

नारन्गी..

हां, यह विटा. सी का गुण है , जो नारन्गी में बहुतायत में होता है.