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युरोपीय पुरूष पूर्व से आये किसानो के वंशज हैं

लिसिस्टर विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं‌ के अनुसार अधिकांश युरोपीय पुरूष उन किसानों के वंशज हैं जो आज से लगभग १०,००० साल पूर्व समीपी पूर्व से आये थे। यह शोध पत्र कल के प्लास (पब्लिक लाईब्रेरी आफ़ साईस) बायलोजी जरनल मे प्रकाशित हुया है।

यह तो सर्वविदित सत्य है कि खेती संभवत: आधुनिक मानव के इतिहास मे सांस्कृतिक परिवर्तन की सबसे महत्वपूर्ण कारक है। एक ही स्थान पर भोजन की उपलबध्ता से मानव को दर दर की ठोकरें‌ खाते हुये खाना बदोश की जिन्दगी की बजाये, एक स्थायी, समाजिक व्यवस्था मिली। इस नयी व्यवस्था, तथा भोजन की उपलब्धता के चलतेमे आज वही मानव समाज ७ अरब लोगों का समाज बन गया है जो पृथ्वी नामक ग्रह पर अपना असितत्व बनाये हुये हैं।

युरोप मे खेती उपजाऊ अर्द्धचंद्र नामक क्षेत्र से प्रारंभ हुई थी। यह इलाका पूर्वी भूमध्य तट से लगा हुआ है तथा पर्शिया की खाडी तक फैला हुआ है जिसमे टिगरिस तथा महानद की घाटियाँ शामिल हैं।

इस बात को लेकर काफी विवाद है कि पश्चिम मे जिस पूर्वी खेती-बाडी का विस्तार हुआ था वह पूर्व से किसानों के देशांतर गमन की वजह से हुआ था या मात्र पूर्वी विचारों व तकनीकों को स्थानीय लोगों‌ द्वारा अपनाये जाने की वजह से हुआ था। अब शोधकर्ताओं ने आधुनिक समाज के जैविक विविधता का अध्यन करके इन प्राचीन तथा विवादित विषयों पर प्रकाश डाला है।

वैलकम ट्रस्ट द्वारा वित्त पोषित इस शोध कार्य मे वाई गुणसूत्र की उस विविधता का अध्यन किया गया है जो कि पिता से जैविक रूप मे पुत्र को प्राप्त होती है। इस शोध के अगुआ मार्क जोबलिगं के अनुसार, "हमारा केन्द्र-बिन्दु यूरोप की सबसे आम वाई गुणसूत्र वंशावली थी। लगभग ११०० लाख लोग इसी वंशवली के वाहक हैं। यह वंशवली दक्षिण पूर्व से प्रारंभ हो कर उत्तर-पश्चिम फैली हुई है, आयरलैंड मे तो यह लगभग १०० प्रतिशत पायी जाती है। हमने यह अध्यन किया कि यह वंशवली युरोप मे किस प्रकार वितरित हुई है। हमने यह भी जानने का प्रयास किया कि युरोप मे इस वंशवली मे किस प्रकार की विविधता है, और यह कितनी पुरानी है।" शोध के परिणाम के अनुसार इस वंशवली का फैलाव नजदीकी पूर्व के क्षेत्र मे खेती के साथ साथ हुआ। यह परिणाम ठोस निस्कर्षों की तरफ इशारा करते हैं।

 इस शोधपत्र के लेखक डा. पैट्रिशिया बलार्स्की के अनुसार,"सारांश यह है कि ८० प्रतिशत से अधिक युरोपीय वाई गुणसूत्र बाहरे से आने वाले किसानो का वंशज है। इसके विपरीत, अधिकांश मातृक आनुवंशिक वंशवली शिकारी-घुमन्तु लोगों‌ से अवतीर्ण हुई है। इससे यह भी सिद्द होता है कि देशांतर कर रहे किसान पुरूष प्रजनन को लेकर शिकारी समूह से अधिक अनुकूलित थे। यह घटना उस समय की है जब मानव खानाबदोश जिन्दगी छोड कर खेतीबाडी की तरफ बढ रहा था। शायद स्थानीय महिलाओं को उस समय के खानाबदोश, शिकारी मर्दों की तुलना मे किसान ज्यादा रूमानी लगते थे। यह तो दिल का मामला है।

-- स्वप्निल भारतीय

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by Dr. Radut.