किताबी चेहरा या फेस-बुक अब धीरे-धीरे नुक्क्ड वाली चाय की दुकान, रेल्वे स्टेशन का स्टाल बनता जा रहा है। रोज नयी नयी बातें होती है, नयी नयी चर्चायें होती हैं।
हल्कि फुल्की गपशप भी और जरूरी मुद्धो पर बहस भी -- हा सब कुछ शिष्टता के भीतर। हिदी मे लिखने पढने वालों का तो मुकाबला ही क्या -- रोज गर्मा गरम खबर रहती है। तो आइये देखें एक दूसरे का असली व किताबी चेहरा।
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