कि जनता को ज़बर्दस्ती अंग्रेज़ी पढ़ाकर गूंगा बनाया जा रहा है;
कि यह सरकार जब हिन्दी को नहीं हरा पा रही है तब हिंग्लिश को मान्यता दे रही है
कि न चाहते हुए भी
उसके बच्चों को इंग्लिश पढ़ाया जा रहा है;
जो यह समझ रहे हैं कि यह आक्रमण केवल हिन्दी पर है, वे भूळ कर रहे हैं कयोंकि यह हमला समस्त भारतीय भाषाओं पर है;
अब जनता हिन्दी, बांग्ला, मराठी, कन्न.ड, तमिल, उड़िया, गुजराती नहीं वरन हिंग्लिश, बंगिंग्लिश, मराइंग्लिश, कन्निंग्लिश, तमिंग्लिश, उड़िंग्ग्लश, गुजिंग्लिश बोलेगी;
वह नहीं जानती कि भ्रष्ट भाषा से भ्रष्ट संस्कृति ही आएगी