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सामजिक

राम ने न तो सीता जी को वनवास दिया और न शम्बूक का वध किया

चोरों की प्रशंसा कोई नहीं करता, किन्तु उनके चौर्य कौशल की प्रशंसा तो करना ही पड़ती है। क्योंकि हम सब ही‌ क्या, बैंक आदि भी पूरी सावधानी से पूरे प्रयत्न करते हैं कि चोरी‌ न हो, किन्तु चोरी‌ हो जाती है। चोरियां अनेक प्रकार की होती हैं। मैं इस समय लेखन की चोरी‌ की बात कर रहा हूं।

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देखिये बोलिविया की हिम्मत

दक्षिण अमैरिका में‌ एक ही देश है जहां मैक्डानल्ड, अपनी पूरी शक्ति लगाने के बाद भी, उपस्थित नहीं‌ है। २४ दिसंबर २०११ को बोलिविया ने उऩ्हें बिदा कर ही दिया।

मैक्डानल्ड या कोका कोला आदि बहुत सशक्त संस्थाएं हैं, इनके जाल दूर दूर तक फ़ैले रहते हैं।

बोलिविया की जनता ने 'फ़ास्ट फ़ूड' की संस्कृति का विरोध किया है। उऩ्होंने घोषणा की, “ भोजन को प्रेमे से, समर्पण के भाव से, एक विशेष शुद्धता से और उसे पकने के लिये पूरा आवश्यक समय देते हुए पकाना चाहिये।"

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गरीबी के मंच पर अमीरी का डिस्को

भारत में यह सामाजिक विषय नहीं है, राजनीतिक विषय है - देखा जाए भारत में तो राजनैतिक भी कम, शक्ति हथियाने का औजार अधिक है। जब कि इसे वास्तव में सामाजिक होना चाहिये और राजनीति को उसमें‌ उपयुक्त नीतियां बनाकर मदद करना चाहिये । अपनी‌ नीतियों से यह शासन समृद्धि तो बढ़ा रहा है, भ्रष्ट राजनीतिज्ञों की और अमीरों की।

भ्रष्ट शासन से हमें किसी‌ भी प्रकार की उन्नति की आशा करना आकाश कुसुम तोड़ना है।

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सकल राष्ट्रीय सुख

सकल राष्ट्रीय सुख की अवधारणा को समझना बहुत कठिन है क्योंकि सुख की अवधारणा ही कठिन है। आखिर यूएसए 'सकल राष्ट्रीय उत्पाद' को अपने जीवन की धुरी क्यों मानता है? क्योंकि उसकी सोची समझी समझ में 'उत्पाद' से ही सुख मिलता है। उनके संविधान का प्रारंभ ही इस वाक्य से होता है कि जनमानस का मूल अधिकार है 'सुख की खोज'।

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अंधविश्वास एवम् तर्कशीलता—एक विश्लेषण

दो घटनाओं की चर्चा से बात शुरु की जाए। एक ट्रक ड्राइवर रात के वक्त सूनसान सड़क पर गाड़ी चलाते हुए जा रहा

था। ट्रक के हेडलाइट में उसने अपनी गाड़ी के आगे सड़क पर कोई चमकती चीज देखी, तो ब्रेक लगाया। गाड़ी से नीचे उतरा,। उसने देखा कि पहिए के नीचे एक जोड़ा साँप कुचला पड़ा है। ड्राइवर सहम गया। उसने अपने बड़ों से सुना था कि जोड़ा लगे साँप को मारनेवाला जीवित नहीं रह पाता है। ढाबे पर पहुँचते ही उसे तेज बुखार हुआ। बेहोशी में रात भर बड़बड़ाता रहा और दो दिन बाद वह मर गया।

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अंधविश्वास एवम् तर्कशीलता—एक विश्लेषण

दो घटनाओं की चर्चा से बात शुरु की जाए। एक ट्रक ड्राइवर रात के वक्त सूनसान सड़क पर गाड़ी चलाते हुए जा रहा

था। ट्रक के हेडलाइट में उसने अपनी गाड़ी के आगे सड़क पर कोई चमकती चीज देखी, तो ब्रेक लगाया। गाड़ी से नीचे उतरा,। उसने देखा कि पहिए के नीचे एक जोड़ा साँप कुचला पड़ा है। ड्राइवर सहम गया। उसने अपने बड़ों से सुना था कि जोड़ा लगे साँप को मारनेवाला जीवित नहीं रह पाता है। ढाबे पर पहुँचते ही उसे तेज बुखार हुआ। बेहोशी में रात भर बड़बड़ाता रहा और दो दिन बाद वह मर गया।

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पारिवारिक तानेबाने

“Life expectancy has increased dramatically; it is another matter that old people are finding more reasons for dying than for living.”
आज के आधुनिकता के परिवेश में आम तौर पर बुजुर्गों के प्रति अवहेलना और उपेक्षा की समस्याओं की चर्चा और भर्त्सना होती रहती है। हम अक्सर हताशा प्रकट करते हैं कि आशातीत प्रगति करने के बावजूद मानव सभ्यता बुजुर्गों को सुरक्षा, सौहार्द, स्नेह और सम्मान का आश्वासन नहीं दे पाती ।

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मस्तिष्क और शराब के सम्बन्ध का और विस्तार

प्रोफ़ैसर झा ने मस्तिष्क और शराब के सम्बन्ध का और विस्तार करने के लिये आग्रह किया है, अत: यह संक्षिप्त टिप्पणी दी जा रही है।

हमें सुख की चाह जन्मजात मिलती है। अर्थात हम सुख चाहते हैं, जाने अनजाने हम में से अधिकांश के जीवन का ध्येय यही होता है।

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जब एक भाषा मरती है तब उसकी संस्कृति भी उसके साथ मर जाती है

'लिविंग टंग्ज़ इंस्टिट्यूट फ़ार एन्डेन्जर्ड लैन्गवेजैज़' इन सैलम, ओरेगान के भाषा वैज्ञानिक डेविड हैरिसन तथा ग्रैग एन्डरसन कहते हैं कि जब लोग अपने समाज की‌ भाषा में बात करना बन्द कर देते हैं, तब हमें मस्तिष्क के विभिन्न विधियों में कार्य कर सकने की अद्वितीय अंतर्दृष्टियों को भी‌ खोना पड़ता है। आगे एन्डरसन कहते हैं कि लोगों को अपनी भाषा में बात करते हुए उऩ्हें वास्तव में अपने इतिहास से पुन: सम्पर्क करते देखने में जो संतोष होता है उसका वर्णन नहीं किया जा सकता। यह निश्चित ही हमारे मस्तिष्क की कार्य विधि तथा मातृभाषा के बीच गहरे संबन्ध को तथा उसका हमारे जीवन पर पड़ रहे प्रभाव को दर्शाता है।

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भारत का मेडिकल टूरिज्म और ओबामा की चिन्ता

यह मात्र संयोग नहीं है कि भारत के विरूद्ध सुपर बग तथा अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की अमेरिकियों के सस्ते इलाज के लिए भारत या मैक्सिकों जाने की चिन्ता हो, दोनो ही मामलों में भारत के विरूद्ध कुप्रकार की गन्ध तो मिलती ही है और साथ ही भारत की धीरे-धीरे बढ़ती ताकत का एहसास भी पूरी दुनियॉ महसूस कर रही है।

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by Dr. Radut.