एक रात, कवि वैज्ञानिक के पास पहुँच गया। कवि के कपडे पुराने, गंदे और उथल पुथल थे। उसके हाव भाव उडे उडे से थे। उसने वैज्ञानिक से कहा, "काव्य, कला से मेरा मोहभंग हो गया है। मेरी कला मे अब कोई आस्था नही रह गयी है। मुझे अब विज्ञान सीखना है!"
क्रुतिदेव००१ - यूनिकोडशुशा - यूनिकोड - शुशाक्रुतिदेव०१० - यूनिकोड -- क्रुतिदेव०१०क्रुतिदेव०१० - यूनिकोड -- चानक्याचांदनी - यूनिकोड - चांदनी आगरा - यूनिकोडअमर, कुडली - यूनिकोडचानक्या - यूनिकोड - क्रुतिदेव०१०चानक्या - यूनिकोड - चानक्यासहारा - यूनिकिड - सहाराप्रकाश - यूनिकोड - प्रकाश