अगर तुम चाहो
तो परिवर्तन संभव है !
पर,
तुम इस चाह से परे
दूसरों की प्रतीक्षा करते हो
और उसकी आलोचना में
वक्त बरबाद करते हो !
उठकर देखो -
धीरे-धीरे कई कदम साथ दिखेंगे.....
चलाने से पहले
ख़ुद चलना होता है,
सीख देने से पहले
सीखना होता है............
असंभव को संभव का आयाम तुम दो।