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प्रों गंगानन्द झा

जीवन की संरचना - बिल ब्रायसन

सजीव कोशिका जीवन की इकाई होती है तथा इसका अन्तर्निहित पदार्थ जीवन का भौतिक आधार हुआ करता है। कोशिका एक जटिल तंत्र (system) होता है । ‘सूक्ष्म में विराट के

दर्शन’ का स्मरण हो आता है, जब हम जीवित कोशिका में झाँकना तय करते हैं । हम शायद इसे अपने आस-पास के बहुत सारे विम्बों के सहारे समझ सकते हैं, शायद जैसे अर्जुन ने कृष्ण के विराट स्वरूप को समझा होगा ।

विषय: 

अंधविश्वास एवम् तर्कशीलता—एक विश्लेषण

दो घटनाओं की चर्चा से बात शुरु की जाए। एक ट्रक ड्राइवर रात के वक्त सूनसान सड़क पर गाड़ी चलाते हुए जा रहा

था। ट्रक के हेडलाइट में उसने अपनी गाड़ी के आगे सड़क पर कोई चमकती चीज देखी, तो ब्रेक लगाया। गाड़ी से नीचे उतरा,। उसने देखा कि पहिए के नीचे एक जोड़ा साँप कुचला पड़ा है। ड्राइवर सहम गया। उसने अपने बड़ों से सुना था कि जोड़ा लगे साँप को मारनेवाला जीवित नहीं रह पाता है। ढाबे पर पहुँचते ही उसे तेज बुखार हुआ। बेहोशी में रात भर बड़बड़ाता रहा और दो दिन बाद वह मर गया।

विषय: 

अंधविश्वास एवम् तर्कशीलता—एक विश्लेषण

दो घटनाओं की चर्चा से बात शुरु की जाए। एक ट्रक ड्राइवर रात के वक्त सूनसान सड़क पर गाड़ी चलाते हुए जा रहा

था। ट्रक के हेडलाइट में उसने अपनी गाड़ी के आगे सड़क पर कोई चमकती चीज देखी, तो ब्रेक लगाया। गाड़ी से नीचे उतरा,। उसने देखा कि पहिए के नीचे एक जोड़ा साँप कुचला पड़ा है। ड्राइवर सहम गया। उसने अपने बड़ों से सुना था कि जोड़ा लगे साँप को मारनेवाला जीवित नहीं रह पाता है। ढाबे पर पहुँचते ही उसे तेज बुखार हुआ। बेहोशी में रात भर बड़बड़ाता रहा और दो दिन बाद वह मर गया।

विषय: 

प्रौद्योगिकी सफल होने पर ओझल हो जाती है

एक घिसीपिटी बात ही दुहराई जाएगी अगर हम कहें कि आज के काल-खण्ड की तस्वीर की रूपरेखा प्रौद्योगिकी के बगैर नहीं बनाई जा सकती। इस आलेख के जरिए हम प्रोद्योगिकी के विकास के केवल एक पहलू की ही चर्चा करेंगे। प्रौद्योगिकियाँ अपनी प्रारम्भिक अवस्था में काफी जटिल रहा करती हैं, लेकिन अन्ततोगत्वा सभी कामयाब प्रौद्योगिकी अधिक महत्वपूर्ण होते जाने के साथ साथ कम दृष्टिगोचर होती हुई रोजमर्रा की जिन्दगी की पृष्ठभूमि में इस प्रकार घुल मिल जाती हैं कि प्रौद्योगिकी के रूप में उनकी पहचान फीकी पड़ जाती है, जैसा कि बिजली तथा रेल के साथ हुआ है। हालाँकि सूचना प्रौद्योगिकी की तरह की चमत्कारिक प्रौद्योगिकी पहले कोई भी

बोन्साई

पेड़ों को गहरी धरती चाहिए होती है ; पेड़ों को प्रशस्त आकाश चाहिए

आज के संपन्न, सभ्य आदमी के पास न धरती है, न आकाश

पर पेड़ उसे चाहिए।

वह पेड़ को बोन्साई बना लेता है गमलों में पेड़ उगाए जाते हैं

पेड़ बौना हो जाता है, पर पूर्ण रूप से उपयोगी रहता है;

बिना धरती के, बिना सम्भावनाओं की भूख के ।

चतुर आदमी अपनी सन्तान को बोन्साई बना लेता है ।

रचना: 

पारिवारिक तानेबाने

“Life expectancy has increased dramatically; it is another matter that old people are finding more reasons for dying than for living.”
आज के आधुनिकता के परिवेश में आम तौर पर बुजुर्गों के प्रति अवहेलना और उपेक्षा की समस्याओं की चर्चा और भर्त्सना होती रहती है। हम अक्सर हताशा प्रकट करते हैं कि आशातीत प्रगति करने के बावजूद मानव सभ्यता बुजुर्गों को सुरक्षा, सौहार्द, स्नेह और सम्मान का आश्वासन नहीं दे पाती ।

विषय: 

मस्तिष्क और मन

"Our brains are the product of our genes, environment and chance." ~ Scientific American, September,2003

विषय: 

हम नशेबाजी क्यों करते हैं ?

एक सवाल मुझे लम्बे अरसे से परेशान कर रहा है। समाज तम्बाकू के सेवन को अस्वीकार्य कर चुका है, पर शराब की सम्माननीयता बढ़ रही है। इसकी क्या युक्ति हो सकती है? ऐसा नहीं है कि शराब से होनेवाली शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और आर्थिक क्षतियों के बारे में समाज में  सूचनाओं का अभाव है। बल्कि आज के समाज की जानकारी है कि तम्बाकू और शराब के बीच हानिकारक होने की प्रतियोगिता हो तो शराब निश्चित रूप से विजेता घोषित होगा।

विषय: 

जीवन-चक्र

विकास के दौरान प्राक्-मानवों के शरीर और आचरण में जो महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए, उनमें चौपाया से दो पाँवों वाला होना, बड़े आकार के मस्तिष्क का विकास एवम् औज़ारों का अनिवार्य रूप से उपयोग करना उल्लेखनीय हैं। इन परिवर्तनों के साथ मनुष्य के जीवन-चक्र में कुछ महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए जो आधुनिक मानव के रूप में हमारी पहचान के लिए निर्णायक हैं।

विषय: 

हम क्यों बूढ़े होते हैं और क्यों मरते हैं।

बचपन में हम अकसर पूछते हैं, आदमी क्यों बूढ़ा होता है, और क्यों मरता है, पर जवान होने पर ये सवाल हमें परेशान नहीं करते । फिर वह प्रौढ़ होता है, तब इस सवाल की प्रासंगिकता का एहसास उसे होता है।

सिद्धार्थ के मन में जब ये सवाल उठे तो फिर वे सिद्धार्थ नही रह पाए। गौतम बुद्ध बन गए।

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by Dr. Radut.