लेख
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हिन्दी विज्ञान कथा : एतिहासिक परिदृश्य -- डॉ. अरविन्द दुबे
हिन्दी विज्ञान कथा के उद्भट इतिहासकार श्री शुकदेव प्रसाद व अन्य कई विद्वानों के अनुसार हिन्दी विज्ञान कथा का इतिहास सन् 1884 से 1888 के मध्य व्यास यन्त्रालय भागलपुर, मध्य प्रदेश से प्रकाशित पत्रिका 'पीयूष प्रवाह' में धारावाहिक रुप से प्रकाशित लम्बी विज्ञान रचना 'आश्चर्य वृतान्...
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जीवन, जीव व मानव: भाग १- पाश्चात्य दर्शन व आधुनिक वैज्ञानिक मत, डार्विन सिद्धान्त. -- डा श्याम गुप्त
सृष्टि- क्रम के क्रमिक आलेख के इस द्वितीय क्रम 'जीवन, जीव व मानव' में हम, --जीवन कैसे आरंभ हुआ, जीव में गति, आकार वर्धन व सन्तति वर्धन (रीप्रोडक्शन ), लिंग भिन्नता भाव, सन्तति वर्धन की लिंगीय स्वतः चालित प्रणाली (सेक्सुअल ओटोमेशन फ़ोर रीप्रोडक्शन ) कैसे प्रारं...
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क्या अन्तरिक्ष के शून्य में प्रकाश सरल रेखा में गमन करता है ? -- विश्व मोहन तिवारी
इस प्रश्न का तो उत्तर कब का दिया जा चुका है ! हमें तो यही पढाया गया है. आज भी यही पढाया जा रहा है. क्या उस उत्तर में संदेह है?
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यूनिवर्स - एक इण्टेलिजेंट डिजाइन (भाग - 3) -- जीशान हैदर जैदी
अब देखते हैं नज़ारे तत्व के। वह तत्व जिनके जरिये हमें मिलता है हर तरंह का पदार्थ।
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विज्ञान कथा एवं विज्ञान-फिल्मों में विज्ञान के संंपुट की आवश्यकता -- डॉ. राजीव रंजन उपाध्याय
विज्ञान कथाओं की, फिल्मों की, चर्चा करते समय पाठक के अन्त:करण में, मानस में यह भावना विद्यमान रहती है कि अवश्य ही इसके विवरण में, चित्रण में, निरूपण में, विज्ञान का संपुट कहीं न कहीं निश्चय ही होगा। इस प्रकार का विचार तर्क संगत भी है और महत्वपूर्ण भी।
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यूनिवर्स - एक इण्टेलिजेंट डिजाइन (भाग - 2) -- जीशान हैदर जैदी
एटम का राज़ तब तक अधूरा माना है जब तक कि न्यूक्लियस की बात न की जाये। न्यूक्लियस, जो एटम का केन्द्र होता है, यहां भी एक डिज़ाईनिंग यानी कलाकारी झलकती है।
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यूनिवर्स - एक इण्टेलिजेंट डिजाइन -- जीशान हैदर जैदी
जबसे इस धरती पर मानव ने होश संभाला है, हमेशा आसपास की वस्तुओं ने उसके अन्दर जिज्ञासा जागृत की है। प्रकृति के अनसुलझे प्रश्नों को उसने सुलझाने का प्रयास किया है। जो सवाल उसके मन में सर्वाधिक बार उठा वह यह था कि इस सृष्टि की रचना किसने की? या ये सृष्टि अपने आप बनी?
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२६ जनवरी विशेषांक: विन्डोज 'अन-इंस्टाल' आन्दोलन -- स्वप्निल भारतीय
बहुत से लोग सोचते होंगे कि मै 'बधुआ' साफ्टवेयर बेचने वालो के लिये इस प्रकार के "बधुआ" जैसे अपमानजनक शब्दों का प्रयोय क्यों करता हूँ! उसका कारण है सूद के साथ उधार चुकता करना। अगर आप से मै कोई किताब मांगू या आप खुशी खुशी मुझे अपनी किताब पढने के लिये दें तो क्या मै चोर,...
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सृष्टि व ब्रह्माण्ड भाग ४ -- डा श्याम गुप्त
भाग ३ में हमने सृष्टि संरचना (वैदिक विज्ञान सम्मत) की भाव संरचना व असंख्य ब्रह्मांडों की रचना तथा सृष्टि रचना में व्यवधान व ब्रह्मा को भूली सृष्टि -कर्म के सरस्वती की कृपा से पुनर्ज्ञान तक वर्णन किया था। इस अंतिम भाग में हम ब्रह्मा द्वारा सृष्टि की रचना, उसकी नियमन शक्तियों की...
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विज्ञान कथाओं में उड़न तश्तरियाँ -- हरीश गोयल
जून २४,१९४७। साँझ का समय। तीन बजे थे। पायलट आर्नोल्ड चेहलिस 'काल एयर ए-२' विमान में वाशिंगटन से याकीमा की ओर उड़न भर रहा था। वह एक अनुभवी तथा कुशल पायलट था। वह अब तक ९००० उडाने भर चुका था। इनमें से आधी खोजबीन और बचाव से संबंधित थीं। आकाश साफ़ था। हवा बहुत हल्की बह रही थी। वह रे...






