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विज्ञान कथाओं में उड़न तश्तरियाँ

जून २४,१९४७। साँझ का समय। तीन बजे थे। पायलट आर्नोल्ड चेहलिस 'काल एयर ए-२' विमान में वाशिंगटन से याकीमा की ओर उड़न भर रहा था। वह एक अनुभवी तथा कुशल पायलट था। वह अब तक ९००० उडाने भर चुका था। इनमें से आधी खोजबीन और बचाव से संबंधित थीं। आकाश साफ़ था। हवा बहुत हल्की बह रही थी। वह रेनिअर पर्वत के निकट उडान भर रहा था। इस समय वह ९२०० फीट की ऊंचाई पर था।

अनायास उसे आकाश में प्रकाश की एक कौंध दिखाई पड़ी। तत्पश्चात उसे नभ में प्रकाशिक वस्तुओं की कतारबद्ध श्रृंखला दृष्टिगोचर हुई। वे रेनियर के उत्तर में ४० कि.मी. दूर थी। पहले उसने सोचा कि यह शायद विमान की खिड़की का प्रतिबिम्ब हो लेकिन तेज गति के निरीक्षण ने इसे नकार दिया। फिर वह उसके सामने आ गया। वे उसके बगल से गुजर गयी। उसने देखा कि वे संख्या में कुल ९ थी। उनमें से ८ तश्तरी के आकार की थी। तथा एक अर्ध चंद्राकार थी। उसने उनका पीछा किया। वे विचित्र वस्तुएं पर्वत के दक्षिण की ओर उड़ने लगीं। इस बार उसने खिड़की खोल ली ताकि उन्हें स्पष्ट रूप से देख सके । वे आकृतियाँ गायब नहीं हुई थी। उसने उन्हें साफ़ साफ़ देखा। वे रेनिअर पर्वत से एडम्स पर्वत की ओर मुडी और गायब हो गयी। आकृतियों की गति २७०० कि.मी.प्रति घंटा से अधिक थी। वे तिरछी पंक्ति में उड़ रही थी। वे पानी पर तैरते हुए तश्तरी के समान प्रतीत हो रही थी अतः अमेरिकी समाचार पत्रों ने इसका नाम उड़नतश्तरी रखा।

इस घटना के पश्चात् विज्ञान कथाकारों की रुचि भी उड़न तश्तरियों पर विज्ञान कथाएँ लिखने के लिए जाग्रत हुई। विज्ञान कथाओं के आधार पर फिल्में भी बनाई जाने लगी।

स्पेंसर गोर्डों के निर्देशन में निर्मित फिल्म 'एटॉमिक सबमरीन' में आर्कटिक सागर में एक पनडुब्बी एक रहस्यमयी किरण द्वारा नष्ट कर दी जाती है पूरे विश्व में इससे सनसनी फ़ैल जाती है। पेंटागन कप्तान डेन वेंडोवर को इसके कारण का पता लगाने के लिए नियुक्त करता है। वह पूरे दल के साथ 'टाईगर शार्क' नामक पनडुब्बी दुर्घटना स्थल पर पहुँचता है। उसे पता चलता है कि समुद्र में गोता लगा रही एक उड़न तश्तरी के एक घातक किरण के प्रहार से पनडुब्बी डूबी थी।

उड़न तश्तरी के सिर में एक आंख नुमा छिद्र होता है। उसी में से वह किरण निकली। वेंडोवर उसका नाम एक आंख होने के कारण 'साईक्लोप्स' रखता है। कप्तान उड़न तश्तरी पर तारपीडो दागने का आदेश देता है लेकिन उड़न तश्तरी से एक जेल की तरह का पदार्थ निकलता है इससे तारपीडो का आक्रमण निष्फल हो जाता है। वह पनडुब्बी को उड़न तश्तरी के नीचे ले जाता है तथा उसकी नोंक से जोरदार टक्कर मारता है। उड़न तश्तरी का वह हिस्सा खुल जाता है। पनडुब्बी में एक छोटी पनडुब्बी 'लंगफिश'होती है। कमांडर होलवे तथा नेल्सन लंग फिश की सहायता से उड़न तश्तरी के भीतर प्रवेश करते है। गलियारे में घना अँधेरा था। अनायास एलियन से उनका संपर्क टेलीपेथी द्वारा होता है। एलियन ऑक्टोपस के समान होते है। एलियन उन्हें बताते है की पनडुब्बी में मौजूद उनके सभी सदस्य मारे गये है। वे मानवों को अपने ग्रह पर ले जाना चाहते हैं तथा पृथ्वी पर अधिकार कर स्वयं बसना चाहते हैं। कमांडर इससे सिहर उठता है। वह एलियन की आंख में 'वेरी' पिस्तौल दागता है। इससे एलियन अँधा हो जाता है। वे दोनों बेतहाशा दौड़ कर 'लंग फिश' में पहुँचते है। तथा वहां से 'टाईगर शार्क' में। हालवे कप्तान से कहता है कि यदि उन्होंने कुछ नहीं किया तो वे सम्पूर्ण पृथ्वी पर अपना अधिकार जमा लेंगे। जब उड़न तश्तरी सागर से बाहर निकल रही होती है तो वे आई. सी. बी. एम मिसाइल से उस पर आक्रमण करते है। इससे उड़न तश्तरी नष्ट हो जाती है तथा सम्पूर्ण पृथ्वी एलियन के कहर से बच जाती है।

रॉबर्ट वाईज के निर्देशन में बनी फिल्म 'दी डे दी अर्थ स्टूड स्टील' (१९५१) हेरी बेट्स कीविज्ञान कथा 'फेअर वेल टू दी मास्टर्स' पर आधारित है। उड़नतश्तरी में आया एक मानव क्लातु वाशिंगटन डी.सी.में उतरता है वह राष्ट्रपति से मुलाकात कर पृथ्वीवासियों को एक संदेश देना चाहता है। राष्ट्रपति उसे इंकार कर देता है। उसके ऊपर सख्त पहरा लगा दिया जाता है। लेकिन क्लातु वहां से बच निकलता है। वह मि.कारपेंटर के भेष में एक महिला हेलन बेंसन के निवास स्थल पर पहुंचता है। उसका पुत्र बोबी, क्लातु को सैर कराने ले जाता है। क्लातु के कहने पर वह उसे एक अमरीकी वैज्ञानिक प्रोफ़ेसर जेकब बर्नहार्ट के घर ले जाता है पर वह वहां नहीं मिलता।

क्लातु उसकी अनुपस्थिति में उसके अधूरे कार्य एडवांस्ड गणितीय समस्या 'एन बॉडी' को हल करता है। क्लातु प्रोफ़े सर को चेतावानी देता है कि पृथ्वीवासियों के परमाणु शक्ति विकसित करने के कारण दूसरे ग्रह के लोग अपनी सुरक्षा को लेकर अत्यन्त चिंतित है। बर्नहार्ट उसे वैज्ञानिकों की सभा में भाषण देने के लिए कहता है। क्लातु चेतावानी देता है कि यदि वैज्ञानिकों ने उसके सन्देश को नहीं माना तो वह पूरी पृथ्वी को नष्ट कर देगा। बर्नहार्ट उसे इससे पहले अपनी शक्ति का प्रदर्शन करने के लिए कहता है। क्लातु हेलन के ऑफिस जाता है वह उसे एक लिफ्ट में ले जाती है। बिजली बंद होने से लिफ्ट अचानक रुक जाती है। क्लातु उसे कहता है कि ऐसा उसके कारण ही हुआ है। अब वह अपना भेद खोल देता है। वह उससे कहता है कि वह एक एलियन है। इस समय उसके कारण ही समस्त विश्व कि बिजली आधे घंटे तक के लिए बंद हो गयी है। इस प्रकार उसने अपनी शक्ति का प्रदर्शन किया है। इधर पुलिस उसका पीछा करती है क्लातु भागने का प्रयत्न करता है लेकिन उसे गोली लग जाती है। हेलन उसे उड़न तश्तरी के पास ले जाती है तथा उसके शव को एलियन रोबोट सैनिक गोर्ट को सौंप देती है। वह उसे उड़नतश्तरी में ले जाता है तथा उसे पुनः जीवित कर देता है। क्लातु पृथ्वी के वैज्ञानिकों को यह सन्देश भेजता है कि मानव ने एलियन्स पर पहले प्रहार किया है तथा वह अन्तरिक्ष में हिंसा की शुरुआत करने के लिये कसूरवार है। यदि दुबारा उसने ऐसा किया तो वह गोर्ट को पूरी पृथ्वी को नष्ट करने की खुली छूट देता है। अब निर्णय पृथ्वी वासियों पर निर्भर करता है। उड़न तश्तरी उसे लेकर आकाश में विलीन हो जाती है.

फ्रेड ऍफ़.सेअर्स के निर्देशन में बनी फिल्म'द अर्थ वर्सेज फ्लाइंग सौसर्स ' में प्रोजेक्ट हुक के तहत अमेरिका कई उपग्रह प्रक्षेपित करता है उनकी मुठभेड़ एक उड़न तश्तरी से होती है। एक गलत फहमी के कारण उड़न तश्तरी पर आक्रमण कर दिया जाता है। एलियन दो वैज्ञानिकों श्रीमती एवं श्री मर्विन को छोड़कर प्रोजेक्ट स्थल के सभी वैज्ञानिकों को मार डालते है। घटनाएँ इस तरह घटित होती है की एलियन द्वारा सम्पूर्ण युद्ध छेड़ दिया जाता है। उड़न तश्तरी वाशिंगटन डी.सी.,पेरिस लन्दन.तथा मास्को पार आक्रमण कर देती है। अंत में एलियन की हार हो जाती है.हमारे वैज्ञानिक उच्च शक्ति की ध्वनि तथ विद्युत शक्ति को संयुक्त कर एक ऐसी शक्ति ईजाद करते है जो उड़न तश्तरियों की उडान को ठप्प करने में सक्षम होती है।

एलन आर्मर के निर्देशन में बना अमेरिकी टी.वी। धारावाहिक 'इन्वेडेर्स' (१९६७-६८) में एलियन एक मरणासन्न ग्रह से आये। वे पृथ्वी पर अधिकार करना चाहते को थे। एलियन पृथ्वी पर छद्म वेष में रहने लगे। एक दिन रात को डेविड विंसेंट एक देहाती सड़क पर बढ़ रहा था। उसने छ। सड़क सुनसान थी। वह रास्ता भटक गया। उसने छोटा मार्ग अपना लिया। उसने बीच में बैठकर भोजन करना प्रारंभ ही किया था कि उसे एक विचित्र व्यक्ति दिखाई पड़ा। वह किसी अन्य गेलेक्सी से आया था। अब डेविड विंसेंट यह जान चुका था कि एलियन्स पृथ्वी पर मानव भेष में रह रहे थे। डेविड विंसेंट उनके परत दर परत राज खोलता है। वह यह जान चुका था कि पृथ्वी पर नाईटमेअर प्रारम्भ हो चुका है। उसने पाया कि जब तक एलियन्स को पीरियोडिक विद्युत मिलती रहती है तब तक वे मानव स्वरूप में ही रहते हैं। जैसे ही उनकी विद्युत व्यवस्था गडबडा जाती है वे अपने मूल स्वरूप में आ जाते है। उनमें कुछ ऐसे गुण थे जिससे वे पहचाने जा सकते थे। उनमें नाडियाँ अनुपस्थित थी. उनमें रक्त नहीं बहता था। उनकी चतुर्थ अंगुली म्यूटटेड थी। वह कृत्रिम लगतीथी। उसका नियंत्रण कई डीलक्स मोडल करते है। मृत्यु होने पर उनका शव चमकने लगताहै तथा वाष्पित हो जाता है। वे शक्तिशाली लेजर का प्रयोग कर विघटित हो जाते हैं। इससे उनकी पहचान छिप जाती है एलियन व्यक्ति को ख़त्म करने के लिए एक ऐसी डिस्क का प्रयोग करते है जिससे पॉँच घातक किरणे निकल कर व्यक्ति के गर्दन प्रहार करती है मस्तिष्क का रक्तस्त्राव हो जाता है। धारावाहिक की पटकथा ब्रिंकले तथा जेरी शोल ने लिखी.धारावाहिक के कुल ४३ एपिसोड थे। इसका प्रसारण ५० मिनट तक होता था।

उड़न तश्तरी पर अधारित फिल्म 'क्लोज एनकाउंटर ऑफ़ द थर्ड काईंड '(१९७७) भी अत्यन्त चर्चित रही। स्पीलबर्ग के निर्देशन में बनी इस फिल्म में उड़नतश्तरी के कई रहस्य उजागार होते हैं एक अज्ञात ग्रह पर एक उड़नतश्तरी उतरती है। उसमें से कुछ विचित्र प्राणी निकलते है। वे द्वितीय विश्व युद्ध के पायलेटों का अपहरण कर लेते है. बीस वर्ष के पश्चात् विमान वापस लौट आते हैं जबकि उड़न तश्तरियाँ मध्य अमेरिका पर मंडराने लगती है। वहां की सरकार एलियन को पर्वत पर उतरने नहीं देती। वहां उनके बीच जबरदस्त मुठभेड़ होती है लेकिन वह असफल हो जाती है। लेकिन हमारा डर निर्मूल साबित होता हैं. एलियन्स हमारे मित्र साबित होते हैं.और वे अपने ज्ञान का उपहार हमें भेंट करते हैं।

गोर विडाल की विज्ञान कथा में एक उड़न तश्तरी दूरदर्शन समाचार वाचक रोजर स्पेल्डिंग के घर की फुलवारी में आकर उतरती है। उसमे से एक एलियन उतरता है। जोनी उसे साथ लेकर आता है एलियन का नाम क्रेटन है.जनरल पावर्स अपनी सैनिक टुकडी से उसे घेर लेते हैं। पावर्स उसे जान से मरने की धमकी देते है लेकिन क्रेटन अमर है। वह उड़न तश्तरी का मुआयना करने के लिए सहायक एडी को भेजता है.एडी को पता चलता है किउड़न तश्तरी में इंजन नहीं है। क्रेटन बताता है कि वह उसके मस्तिष्क में छिपे पुर्जों से चलती है। उसे नष्ट नहीं किया जा सकता। तब पावर्स विश्व परिषद् के अध्यक्ष पाल लारेंट को बुलाते हैं.वह क्रेटन से शक्ति का प्रदर्शन करने के लिये कहते हैं। तभी विश्व के सैनिकों की सभी बंदूके आकाश में उठ जाती है। एलियन लारेंट से मिलकर पृथ्वी पर तृतीय विश्वयुद्ध कराना चाहता है।

हिंदी के विज्ञान कथाकारों ने भी उड़न तश्तरियों पर कहानियां लिखी है। हरिकृष्ण देवसरे की 'उड़न तश्तरियाँ' नामक कथा में एक विमान रहस्यमयी ढंग से दुर्घटनाग्रस्त हो जाता है। उसका कारण एक उड़नतश्तरी थी। तभी एक उड़नतश्तरी एक बालक के सिर पर से गुजरती है वह बेतहाशा भागने लगता है। उड़नतश्तरी उसका पीछा करती है.वह अचेत हो जाता है तथा स्वयं को एक बिस्तर पर पाता है। एलियन उसे एक दूसरे सौरमंडल के ग्रह पर ले जाते हैं. वे बौने होते हैं। वे लोग पहले दानवाकार थे। धीरे धीरे वे बौने होते गये। उनके ग्रह से एक ऐसी गैस रिसती है जिससे ग्रह ठंडा होता जाता है। वे पृथ्वी पर इसलिए आते है ताकि वे यह जान सके कि क्या पृथ्वी का वातावरण उनके रहने के योग्य है.बालक उन्हें अपना दोस्त बनाना चाहता है पर एलियन को भय है कि उनकी गोपनीयता भंग हो जायेगी.वे बालक को भ्रमण करा कर उसे पुनः उड़नतश्तरी में धरती पर भेज देते हैं.वह पिता से उड़नतश्तरी पर चर्चा करता है।

देवसरे की विज्ञान कथा 'मंगल पर राजू ' में एक एलियन  उड़नतश्तरी में मंगल ग्रह से धरती पर आता है. राजेश को जैसे ही नींद आने लगती है उसे एक विचित्र होटल दिखाई पड़ता है। वह होटल में पहुंचता है। होटल घर्र घर्र करता उड़ जाता है। वह वास्तव में एक उड़नतश्तरी होता है एलियन उसे मंगल ग्रह पर ले जाते हैं। उनकी आंखे बटन जैसी तथा नाक एक ट्यूब के समान होती है। मंगल पर पानी की कमी होती है। वे पृथ्वी से पानी लाने की योजना बनाते है। धरती पर लौटने पर राजेश प्रोफ़ेसर लुम्बा को यह बात बताता है।

देवसरे की विज्ञान कथा 'आओ चंदा के देश चलें 'चंगु मंगू एक विमान में पहुंचकर उसे उड़ा देते हैं। आकाश में विमान डगमगाने लगता है। अन्तरिक्ष यात्री रेशमा तथा हाशिमा उन्हें बचा लेते है.अचानक उनका सामना एक उड़नतश्तरी से होता है। वे उसे मार गिराते हैं। फिर छः उड़न तश्तरियाँ आकर उन्हें घेर लेती है एलियन उन्हें अपने ग्रह पर ले जाने को विवश कर देते है। वे उन्हें अपने ग्रह की सैर करातेहै.तत्पश्चात् आकाश मार्ग में पहुंचा कर विदा लेते है। चंगु मंगू तब चन्द्र लोकमें पहुंचकर चुन्नू से मिलते हैं।

विज्ञान कथा 'स्वान यात्रा ' में धरती से डॉ. श्रीधरन का अपहरण स्वान वासियों द्वारा कर लिया जाता है। वे धरती पर एक केप्स्यूल भेजते हैं उसे तोड़ने पर कुछ फिल्में निकलती है फिल्म से रॉबर्ट को यह पता चलता है कि स्वान वासियों को यह डर है कि कहीं पृथ्वीवासी विज्ञान में तरक्की करतेहुए ऐसे यानो का निर्माण नहीं करले कि उनके ग्रह तक पहुँच जाये। सच में डॉ. श्रीधरन एक ऐसे ही यान पर कार्य कर रहे थे। अंत में डॉ. श्रीधरण अपनी धर्मपत्नी को भी स्वान ग्रह पर आकार बसने के लिए कहते हैं। देवसरे कि विज्ञान कथाएँ 'अन्तरिक्ष के रहस्य 'तथा 'होटल का रहस्य 'में भी उड़नतश्तरी के प्रयोग हुए है। 'होटल के रहस्य' में एक उड़नतश्तरी होटल को ईंधन देने के लिए आती है।

देवेन्द्र मेवाडी की 'खेम एन्थानी की डायरी' में खेम एन्थानी देवथल नामक स्थान पर पहुँचते है जहाँ उड़न तश्तरी देखी गयी.वहां युवकों को एक गोलाकार वस्तु मिलती है.एन्थानी इसे अपने पास रख लेते है। रात में वे देखते है कि गोलाकार वस्तु का खोल पृथक हो गया है। उसमे से चार लम्बी पतली  रचनाएँ निकली जो हाथ का काम कर रही थी. धड़ के निचले हिस्से से भी चार रचनाएँ निकली उसमें से दो रचनाएँ पावों का काम कर रही थी। शेष दो अन्य कामों के लिए थी। वे उसे लेकर उड़नतश्तरी के उतरने के स्थान पर पहुंचते हैं। उड़न तश्तरी में से उसी प्रकार के जीव उतरतेहैं लेकिन बड़े बड़े। वे उन्हें ' प्लैंकटोनिया' ग्रह पर ले जाते है।

एलियन पेड़ पौधों की तरह ही भोजन प्राप्त करते हैं वे उन्हें अपने चूषकों से खाते है। वहां २८ घंटे का दिन होता है तथा २८ घंटे की रात। एन्थानी को पता चलता है किउक्त ग्रह पर पानी तथा खनिज पदार्थ एक जगह नही मिलते थे। वहां कार्बनडाईआक्साईड की भी कमी हो गयी थी। अतः कालांतर में भोजन की तलाश में पेड़ पौधे चलने लगे। वर्ष में एक बार फूलों का मिलान करके वे शिशु जन्मते हैं। पृथ्वी पर बीज से जन्में शिशु का नाम जुजुबी था। उसे लेने के लिए ही उड़न तश्तरी पृथ्वी पर उतरी थी.अंत में उड़नतश्तरी खेम एन्थानी को धरती पर छोड़ देती है खेम एन्थानी अपनी डायरी को विज्ञान कथाकार देवेन को सौप देते हैं।

मेरी विज्ञान कथा' 'द्रूमा' में एलियन प्रिटोरिया नगर की एक ऊँची पहाड़ी पर बने शीश महल में आकर रहते है तथा शहर पर कहर बरपाने लगते हैं। वे एक ऐसी किरण छोड़ते है जिससे व्यक्ति का तंत्रिका तंत्र गडबडा जाता है वह चीखता है द्रूमा। ..और समाप्त हो जाता है। ऐसे ही सुनसान सड़क पर एक महिला की हत्या हो जाती है। सी। आई। डी. इंसपेक्टर मि.थापर, मिस डोरिना को इस हत्या का राज जानने के लिए कहते है। डोरिना मि.वर्क के साथ महिला के निवासस्थल पर पहुँचते है। वहां महिला की एक डायरी मिलती है। महिला का नाम लिट्जी होता है। उसके पति का नाम पेरिमेशन है। डायरी से पता चलता है कि जब एक बार पेरिमेशन तथा लिट्जी एक हाईड्रोफाईल नौका में सैर कर रहे थे तो एलियन डूराटो द्बारा पेरिमेशन का अपहरण कर लिया जाता है।

पेरिमेशन ने ऐसी रेडियो तरंगो की खोज की जिससे वह बाह्यअन्तरिक्ष वासियों से संपर्क स्थापित कर सकता था। इधर लिट्जी सुनसान जगह पर अकेली रहने लगी। वह अत्यन्त भयभीत थी। बाद में उसकी हत्या एलियन द्वारा कर दी जाती है। डूराटो पेरिमेशन के विधुत के झटके देता है। पेरिमेशन मूर्छित होने का नाटक करता है। होश में आने पर वह स्मरण शक्ति खोने का नाटक करता है। उसे पता चलता है कि डूराटो वास्तव में एलियन नही था। वह धरती का ही एक वैज्ञानिक डॉ, मुलरो था। उसने 'ताओसाती' नक्षत्र से रेडियो संदेशों के द्वारा सम्पर्क स्थापित किया। वह एक ऐसी शक्ति प्राप्त करना चाहता था जिससे वह सम्पूर्ण पृथ्वी पर अधिकार कर सके। उसने उक्त नक्षत्र वासियों से 'विधातु कणों'(एंटीमैटर ) की शक्ति प्राप्त की। पेरिमेशन को 'द्रूमा' किरणों का राज भी पता चला। वास्तव में वे किरणें विधातु कणों की ही बनी हुई थी द्रूमा का पूरा नाम है' डेविल रेज ऑफ़ ओमन मिस्टीरिअस एंटीमैटर'। इन्ही किरणों से वह सेंसरी न्युरोनों के बीच बने न्यूरो- ट्रांसमीटर पुल को ढहा देता था इससे व्यक्ति की मृत्यु हो जाती थी। शीश महल पर भी उसने विधातु कणों की परत चढा दी थी ये सामान्य कणों इ को प्रतिकर्षित करती अतः शीश महल पर बमों का कोई असर नही होता। पेरिमेशन ने तब 'एप्सिलोन एरिडेनी' नक्षत्र से रेडियो सम्पर्क स्थापित किया। एलियन उड़न तश्तरी में बैठकर आते है। समुद्र के भीतर उसने ऐसे कणों को प्राप्त किया जिससे वह पृथ्वी को डूराटो के कहर से बचा सका।

मेरी एक अन्य कथा 'कॉम्प्लेक्स -३९' में प्रसिद्ध वैज्ञानिक शेलेश भारती का अचानक अपहरण होजाता है राजेश और अशरफ भारती के निवास स्थान पर पहुँचते है। वे तहखाने में पहुंचते है। वहां अशरफ भी गायब हो जाता है. एक दिन अशरफ राजेश को बताता है कि हेम्पटन लेसर ने 'बीटा-पिक्टोरिस' नक्षत्र से कॉम्पलेक्स -३९ नामक शक्ति प्राप्त की है.जिसका उपयोग वह पृथ्वी पर कहर बरपने के लिए करता है। बीटा -पिक्टोरिस के वासी हेम्टन के मस्तिष्क में एक ऐसा कम्प्यूटर फिट करते है जिसकी सहायता से वह कॉम्प्लेक्स -३९ पर नियंत्रण रखता है।

मेरी कथा 'अन्तरिक्ष नरशिप' में एक युवक सांताआना के निकट झील में से एक सिगार की तरह के यान को निकलते हुए देखता है। नाम था एंड्रयू. वह हेनरी को फ़ोन करता है। हेनरी जलपोत विक्टोरिया के कोमोडोर को सन्देश भेजता है अनेक ओसेनोग्राफर विक्टोरिया की छत पर दौड़े. उड़नतश्तरी से नीला हरा प्रकाश निकल रहा था। पलक झपकते उसने झील में डुबकी लगाई। ओसेनोग्राफर ने एक छोटी मिसाइल से उसका पीछा किया। वह झील से बाहर निकली तथा गायब हो गयी। ठीक छः वर्ष पश्चात् अलामागार्दो में एक उड़नतश्तरी दिखाई पड़ी। जलपोत 'रिजेली वार फील्ड 'समुद्र में तेजी से चक्कर लगा रहा था। मि.एंड्रयू 'एल्विन' पनडुब्बी में थे। देखते ही देखते उड़नतश्तरी ने समुद्र के भीतर डुबकी लगाई। तुंरत मिसाइलें कार्यरत होगई। 'उड़नतश्तरी किसी प्रकार बच गयी। लेकिन उसने पनडुब्बी को डुबो दिया। एंड्रयू बाल बाल बचे। हेनरी एक दूसरी पनडुब्बी में पीछा कर रहे थे। वे पनडुब्बी को 'अकॉस्टिक ब्लाइंड स्पॉट' पर ले गये.इस स्थान ने पनडुब्बी के छिपने का कार्य किया। इस बार के आक्रमण से हेनरी को सफलता मिली। उड़नतश्तरी डूबते हुए समुद्र के भीतर मध्य में स्थिर हो गयी। उसके छिद्र खुल चुके थे। एंड्रयू उड़नतश्तरी के निकट पहुंचे. उन्होंने तीन बौने बाह्य अन्तरिक्ष वासियों के शव देखे लेकिन। क्या वे वाकई शव थे ?

डॉ. राजीव रंजन उपाध्याय की विज्ञान कथा ' ध्यान मशीन ' में श्रीमती पोवालिना एक ऐसी मशीन को विकसित करती है जो मानव मस्तिष्क में उठती तरंगो एवं भावनाओं को कंप्यूटर के सहयोग से स्पष्ट रूप से अंकित करती है। डॉ. पेचार तथा लेख़क उसके घर पहुँचते है। पोवालिना डॉ. पेचार के सिर पर एक टोपीनुमा वस्तु पहना देती है वह इसके कुछ छिद्रों में इलेक्ट्रोड लगा देती है। वह डॉ.पेचार से ध्यान केन्द्रित करने के लिए कहती है। लेख़क को कम्पूटर स्क्रीन पर तिरछी और खड़ी रेखाएं दिखाई दी। वह उन्हें मन में संगीत की एक धुन गुनगुनाने के लिए कहती है। तब स्क्रीन पर हल्की एवं धुन दिखाई देती है।

अब पोवालिना स्वयं पर प्रयोग करती है। वह बिना किसी इलेक्ट्रोड के लगाये ही ध्यानस्त हो जाती है तथा टेलीपेथी करती है। कंप्यूटर पर भाव तरंगे दिखाई देने लगती है। १० मिनट पश्चात् स्क्रीन पर एक ऐसा दृश्य दिखाई पड़ता है जिसे देखकर वे चौंक पड़ते है। कंप्यूटर स्क्रीन पर एक सिगार की तरह की आकृति दिखाई पड़ती है। जो किसी उड़न तश्तरी की ही हो सकती है। वे देखते हैं कि एलियन की ऑंखें कान तक तिरछी है। कान गायब है। नाक में हल्का सा उभार तथा होठ अत्यधिक चपटे हैं। उड़न तश्तरी एक तीव्र आभा बिखेरती है। उसका रंग पहले गुलाबी तथा फिर गुलाबी में बदल जाता है। ध्यान टूटने पर पोवालिना बताती है कि अन्तरिक्षवासी हमारी आकाशगंगा के एक दूरस्थ ग्रह 'नृति' से आये है। यह ग्रह करीब १००० लाख प्रकाशवर्ष दूर है। यान टेकायन है तथा प्रकाश कीगति से तेज चलता है.दुबारा सम्पर्क करने पर पता चलता है कि एलियन राजस्थान के मरुस्थल अथवा हिमालय के दूसरी ओर के रेगिस्तानी भूभाग पर अपना यान उतारने वाले हैं।

डॉ जयंत विष्णु नार्लीकर की विज्ञान कथा 'आसमानी निगाहें 'में नासा के वैज्ञानिक, रोजर बकलैंड को विदा देने के लिये उनके घर पहुँचते हैं। रोजर एफ. बी.आइ। एजेंट बिल से कहते है कि जिस यात्रा पर वे जा रहे हैं, वहां से वे पुनः नहीं लौटेंगे। टेक्सास में उड़न तश्तरियाँ उतरती है, तारापुर के पास छोटे हरे मानव दिखाई दिए, आदि घटनाओं का पुलिंदा वे बिल के सामने रखते हैं, लेकिन इस पर उन्हें विश्वास नहीं है।

वे बिल के आगे एक फोटोनुमा चित्र प्रस्तुत करते है उस पर टॉप सिक्रेट लिखा हुआ एवं नासा का ठप्पा लगा होता है। बिल उसे गौर से देखता है उसे सिगार जैसी वस्तु दिखाई देती है जिसके आसपास कुछ बिंदियाँ होती है बिल कहता है, ये बिंदियाँ मनुष्य की आकृति बनाती है और एक बड़ी सी चीज कुछ और नहीं अन्तरिक्ष यान है। पिछले माह में धरती के चार यान अन्तरिक्ष में पहुंचकर गायब हो गये। अंतिम यान में मि. फ्रॉस्ट थे। उन्होंने ही वह फोटो प्रेषित की थी। आखिर विमान कहाँ गायब हो जाते है, इसकी तह में जाना आवश्यक था। बिल अपने मित्र जैक बाल्डविन को फोटो दिखाकर उसकी सूक्ष्मता से जाँच सात दिन में करने के लिये कहता है। छठा दिन भी ढलने वाला था। जैक परेशान था। उसका बेटा जूनियर जैक आता है। वह फोटो में एक व्यक्ति को हैमबर्गर खाते हुए देखता है। गुत्थी सुलझ जाती है वे एलियन नही थे। एलियन हैमबर्गर नही खाते। न ही वह यान उड़न तश्तरी थी। पता चलता है कि ये आसमानी निगाहें पृथ्वी वासियों की ही करतूत है। उड़न तश्तरी का मायाजाल उनके द्वारा ही फैलाया गया है। वे धरती के ही लोग है। वे विमानों को गायब करके यह पक्का विश्वास दिलाते हैं कि यह एलियन का काम है। वे अपहृत वैज्ञानिकों तथा विमानों का उपयोग जासूसी के लिये करना चाहते थे।

जीशान हैदर ज़ैदी की विज्ञान कथा 'अनजान पडौसी ' में एक रॉकेट के प्रक्षेपण में गड़बड़ हो जाती है। प्रो. भास्कर प्रो. राज को बुलाते हैं। राज इस समस्या को चुटकियों में हल कर देते है.घर पहुँचने पर राज को यह पता चलता है कि उनकी बेटी की कारदुर्घटना में मौत हो जाती है.वह खून से लथपथ थी। यह देखकर भी वे एक पुस्तक पढने चले जाते हैं। पत्नी किताब को छीनकर फैंक देती है। राज भावविहीन थे, लेकिन पॉँच साल पहले ऐसा नहीं था। एक दिन वे एक महात्मा से मन्नत मांगने जंगल में पहुँचते हैं लेकिन वे रास्ता भटक जाते हैं अचानक उन्हें एक उड़नतश्तरी दिखाई पड़ती है। उसमें से एक चमकीला काला प्राणी निकलता है.वह बताता है कि पृथ्वी की सतह के भीतर खोखले स्थान में एक सभ्यता निवास करती है.जो उनसे काफी अधिक उन्नत है। वह वहीँ से आया है। वहां सभ्यता का निर्माण अग्नि  तथा तपती हुई धातुओं से हुआ है। वह सभ्यता भावशून्यहै.एलियन राज से भावनाएं लेकर तथा उनकी प्रतिकृतियों का निर्माण कर अपनी सभ्यता में डालना चाहता है इसके बदले में राज के मस्तिष्क में बुद्धि डालकर उसे विश्व का सबसे जीनियस व्यक्ति बनाकर उपकृत करना चाहता है। प्रो. राज इससे सहमत होजाते है.वह प्राणी ऐसा ही करता है। प्रो. राज जीनियस हो जातेहैं पर भावनाविहीन। घर पहुँचने पर पत्नी प्रो.राज से कहती है ,"तुम महान हो किन्तु मनुष्य नहीं"।

मनीष मोहन गोरे की विज्ञान कथा 'आई, उड़नतश्तरी ' में अनजान ग्रह से लोग ताजमहल और कुतुबमीनार जैसी धरोहर की नक़ल करने आते हैं। उनके ग्रह पर पृथ्वी से ज्यादा उन्नति हो चुकी है.उन्होंने अदृश्य होने की मशीन का आविष्कार कर लिया है। इरफान ह्यूमन की विज्ञान कथा 'उड़नतश्तरी' में एलियन उड़नतश्तरी में आते हैं.वे एकं व्यक्ति के मस्तिष्क में चिप फिट कर देते है। तब व्यक्ति असाधारण कारनामें करने लगता है. उनकी उड़नतश्तरी पर एक अन्य विज्ञान कथा है 'रोबोनोइड'।

बाह्य अन्तरिक्ष में जीवन है इससे नकारा नहीं जा सकता। जहाँ पानी है, वहां जीवन हो सकता है। चंद्रमा पर पानी है। इसकी खोज में भारत के चन्द्रयान तथा उसमें लगे पानी की मैपिंग करने वाले नासा के उपकरण 'मून मिनरोलोजी मैपर' (एम -३) की अहम् भूमिका रही है। एम -३ से जुड़े नासा के अनुसन्धान - प्रमुख कार्ल पीटर्स ने स्पष्ट रूप से यह कहा है कि इसरो तथा चंद्रयान -१ के बिना पानी की यह खोज हो ही नहीं पाती। चंद्रमा को बेजान तथा सूखा पिंड माना जाता है लेकिन वहां पर पानी का मिलना आश्चर्यजनक है यदि चंद्रमा जैसे बेजान पिंड पर पानी मिल सकता है तो सौरमंडल के पार के ग्रहों में भी पानी मिल सकता है। लो इसकी खोज भी हो गई है। कल्किओन से मुझे पता चला कि नासा  के वैज्ञानिकों ने १५० प्रकाशवर्ष दूर तारामंडल में ग्रह ' एच। डी.२०९४५८ बी ' पर पानी, मीथेन तथा कार्बन डाई आक्साईड पाया है। ये सारे तत्त्व जीवन के लिये आवश्यक प्राथमिक रसायन है तथा जैविक प्रक्रियाओं के लिये बेहद अहम् है। इसी प्रकार सन् २००८ में खोजे गये ग्रह' एच डी १८९३३ बी '.पर हब्बल तथा स्पिट्जर ने कार्बन डाई आक्सईड,मीथेन तथा वाष्पीकृत पानी की मौजूदगी के संकेत दिये.इससे किसी ग्रह पर जीवन की सम्भावना बलवती हो जाती है। यदि किसी ग्रह पर जीवन है तो कोई ऐसा भी ग्रह हो सकता है जहाँ जीवन उच्च कोटि का हो। जहाँ बौद्धिकता समन्वित सभ्यता निवास करती हो। ऐसे में यदि कोई उड़नतश्तरी सुदूर ग्रह से आती हो तो हमें आश्चर्य नहीं होना चाहिए।

-- हरीश गोयल
सह-सम्पादक (कल्किआन हिंदी)

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