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जादुइ यथार्थ की कथाएं (फ़ैन्टैसी)

फ़ैन्टैसी के लिये हिन्दी में संतोषजनक शब्द 'मायावी' या 'कपोलकल्पना' या 'जादुई यथार्थ' ही मिलता है । आज जिस त्वरित वेग से अंग्रेजी के शब्द ही अपनाए जा रहे हैं तो अधिकांश शायद यही कह दें कि हिन्दी में अलग शब्द ढूंढने की क्या आवश्यकता है, फ़ैन्टैसी ही अपना लें। विदेशी भाषा से शब्द ग्रहण करने में कोई विरोध नहीं होना चाहिये बशर्ते कि उस विदेशी शब्द के लिये हमारे पास उपयुक्त शब्द न हो। मेरा प्रयास यही है कि हम पता तो कर लें कि हमारे पास फ़ैन्टैसी के लिये कोई उपयुक्त शब्द है या नहीं।

ऐसा भी नहीं कि इस मायावी विधा का उपयोग भारत में पर्याप्त नहीं हुआ, खूब हुआ है। विश्च के पुरातनतम कवि वाल्मीकि की सर्वोत्कृष्ट रचना ' रामायण' में खूब हुआ है, और उसके बाद भी महाभारत में और फ़िर स्वयं रामचरित मानस में हुआ है। अनेक विद्वान तो इनमें वर्णित उन घट्नाओं को 'विज्ञान कथा' मानते हैं, यह नामकरण बहस का विषय हो सकता है, वह फ़िर कभी। रामायण के मायावी कार्य केवल राक्षस ही करते हैं, उनका यथार्थ से सम्बन्ध नहीं, वे एक भ्रम ही पैदा करते हैं। हनुमान जी का हिमालय से पर्वत उखाडकर लाना मायावी नहीं है वरन एक वरदान की शक्ति का याथार्थिक फ़ल है, अत: फ़ैन्टैसी है, कपोलकल्पना है, या जादुई यथार्थ है। अत: फ़ैन्टैसी के लिये मायावी शब्द पूरी तरह से उपयुक्त नहीं है।

कपोलकल्पना या अतिकल्पना के अर्थ एक तो रूढ हो चुके हैं, और दूसरे, किसी भी विधा के लिये यह नाम लम्बा-सा लगता है। हम  'कल्प्नातीत' शब्द पर थोडा विचार करें, इस शब्द का उपयोग हम तभी करते हैं जब कोई कल्पना सामान्य कल्पना से भी अधिक ऊंची हो या कहें कि अद्भुत हो। फ़ैन्टैसी में अद्भुत रस का होना आवश्यक् है। अत: कल्पनातीत फ़ैन्टैसी के लिये उपयुक्त शब्द हो सकता है।

जादुई यथार्थ फ़ैन्टैसी के लिये उपयुक्त लगता है और साहित्य में इसका उपयोग फ़ैन्टैसी के अर्थ में हो रहा है। जादुई शब्द में यथार्थ का विशेषण मह्त्वपूर्ण है क्योंकि यह उसे मायावी के अर्थ से अलग करता है इसमें जादू की तरह सब घटनाएं आकाश कुसुम की तरह केवल कल्पना में नहीं होतीं वरन यथार्थ से उनका सम्बन्ध रहता है वह चाहे कितना ही अदृश्य क्यों न हो। साहित्य में फ़ैन्टैसी के उपयोग में तर्क संगति या प्राकृतिक नियमों से संगति चाहे न दिखे, किन्तु उसमें एक आन्तरिक तर्क संगति आवश्यक या कहें अनिवार्य होती है।

क्या पाठक इस नाम पर अपने विचार देंगे?



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by Dr. Radut.